बस बहानों से अब तौबा, आये कल और काम शुरू
चैन अभी तो ले लेने दो, तबियत ज़रा नासाज़ है
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ताज़ा ताज़ा था सबेरा ज़िंदादिल उजाला था बात बात पर होता हंसना हर अरमान निकाला था घंटे बीते ,समय कुछ निकला आ गयी दोपहर अलसायी सी ऊपर नीचे, गर्मी राहत थी धूप पर बदली छायी सी वक़्त का चलना ज़ारी है अब समय बड़ा ही भारी है चलो समेटो जल्दी जल्दी अब शाम होने वाली है ये जिया है हमने दिन भर वो सिर्फ झांकी सा रह जायेगा माना पाया काफी कुछ पर कुछ बाक़ी सा रह जायेगा घिरेगा अँधेरा रात होगी कल तक ना कोई बात होगी हमारी भी आँखे बंद होंगी अंत में सो ही जायेंगे पर अभी तो आँखे खोल लो सिर्फ शाम होने वाली है
Many times you underestimate..... Sometimes you underestimate to be embarrassed..... Existence is never insignificant..... बहुत छोटी सी अदनी सी चीज़ लगे थे तुम मंज़िल की तो बात छोड़ो पहुँच तुम्हारी सीढ़ी तक भी होगी इस पर भी शक था मुझे छोटे से तुम छोटे छोटे से कदम तुम्हारे वोह भी ज़मीन पर मन ही मन हँसता मैं कुलांचे भरता रहा हवा में आज परेशान इस बात पर नही .... तुम पहुँच गए..... हैरान हूँ … तुमसे ही पूछ रहा हूँ पहुंचा कैसे जाता है? आज भी तुम चीज़ हो... पर पहुंची हुई
प्रश्न : बूढ़े शरीर (टूटे गिटार ) और आत्मा (धुन) में यदि संघर्ष होगा तो क्या होगा? उत्तर: मेल बेमेल होगा जब तब ऐसी समस्या आएगी बात बिलकुल नहीं बनेगी या बिलकुल ही बन जायेगी अगर युद्ध मानो तो.…… होना है क्या अब शंखनाद होगा बजेगी दुंदुभि कर्कश संवाद होगा रुदन की ध्वनियां दृश्य विचित्र होगा भवानी का क्रोध शंकर का नृत्य होगा अगर संगीत मानो तो…… होना है क्या जीवन गीत होगा बूढ़ा गिटार भी धुन का मीत होगा साथ देगा जब तक सांस आबाद होगी उसके बाद तो क्या कहने धुन आज़ाद होगी
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