एक सवाल था
अकेला था
अलबेला था
अपने साथी
अपने हमनफ़स
अपने जवाब
की  तलाश में
घूम रहा था
एक ही धुन थी
उसको पा लेना
उसी में झूम रहा था
कोशिशो को
लगातार
बार बार
नाकामी तो मिलती थी
पर जवाब नहीं मिल रहा था
थक गया था अब वो
बदन भी टूट रहा था
अभी तक जकड़े हुए था हौसला
शायद अब कुछ हिस्सा छूट रहा था
धीरे धीरे रास्ते में कुछ और लोग मिले
सब थके से निराश से
होश सबके खस्ताहाल थे
वो भी कुछ ढूंढ ही  रहे थे
वो सब भी सवाल थे 

पहले एक सवाल था........
अकेला था .......
अब कई सवाल थे.…… 
मेला था.…… 

जवाब का अब भी दूर दूर तक कुछ पता न था.………………… 
 

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