तमाम सफर किया है हमने फासले भी तय किये हैं हौसले के थकने से पहले क्यों न कहीं अब बैठ जायें शाम है होने को आई धुँधला धुंधला सा है मंज़र दिन के ढल जाने से पहले क्यों न एक दिया जलायें हर एक बात दिल की मानी जी भर धड़के साथ इसके इसीकी हमेशा सुनते आये क्यों न अब इसे समझायें कहते थे लोग अक्सर हम ही अनसुनी सी करते कभी हम भी फ़ना होंगे क्यों न अब मान भी जाएं ये बाते गहरी गहरी उलझन सी हो रही है खुशनुमा हो जाए मौसम क्यों न एक जाम बनाएं
Posts
- Get link
- X
- Other Apps
कुछ लोग आने लगे हैं अभिनय तुम्हारा देखने क्यों न आज कुछ अलग करो तुम किरदार को अपना पूरा बदल डालो.... मायूसियत को करो रुखसत दर्द को कर दो दफा और मेरी मानो तो आंसुओं को भी चेहरे से पूरा हटा लो.... मत करो परवाह कि 'कोई' अभी आया नहीं देर हो जाती है अक्सर तुम ही हंस कर तब तक क्यों न तमाशे को सम्भालो .... मंजे हुए फनकार हो तुम तुम्हारा अंदाज़ निराला है बहुत हुआ अब चलो मंच पर पर्दा उठने वाला है कुछ लोग आने लगे हैं अभिनय तुम्हारा देखने
- Get link
- X
- Other Apps
और उधर सूरज हताश है अपने आप से सदियों से सुलगते रहने के विचित्र इस अभिशाप से आ गया है तंग वो इस तेज से, प्रताप से अक्सर है सूरज सोचता चाँद बेहद खुशनसीब है दिखने में सुन्दर है ही चांदनी भी करीब है उधर चाँद क्या उसे भी कुछ पता होगा ?..... सूरज खुद को चांदनी में भिगोना चाहता है और अगले जनम में खुद चाँद होना चाहता है
- Get link
- X
- Other Apps
पता नहीं कैसी जादुई ट्यूनिंग करी है बनानेवाले ने हर बार लगता है..... बस ये मुसीबत जो सामने खड़ी है अगर टल जाए तो बात बन जाये जान लगाकर तमाम कोशिशों के बाद बात बनती दिखती है पर हाथ में आती है एक नई परेशानी जो मंद मंद मुस्कराती है और मन ही मन दाद देती है... मान गए बनानेवाले कैसी जादुई ट्यूनिंग करी है इसको हर बार लगता है ....
- Get link
- X
- Other Apps
क्या भूलूँ क्या याद करूँ मैं ? सफर जहाँ से शुरू हुआ था पहुँच गया हूँ उसी जगह पर बाल खुजाते सोच रहा हूँ फिर से क्या शुरुआत करूँ मैं? क्या भूलूँ क्या याद करूँ मैं ? क्या भूलूँ क्या याद करूँ मैं ? तुम तो सच्चे हीरे सरीखे मैं पथरीले कंकड़ जैसा जब तुम उलझन में पड़े हुए हो तब अपनी फिर क्या बात करूँ मैं क्या भूलूँ क्या याद करूँ मैं ?