क्या भूलूँ क्या याद करूँ मैं ?
सफर जहाँ से शुरू हुआ था
पहुँच गया हूँ उसी जगह पर
बाल खुजाते सोच रहा हूँ
फिर से क्या शुरुआत करूँ मैं?
क्या भूलूँ क्या याद करूँ मैं ?
क्या भूलूँ क्या याद करूँ मैं ?
तुम तो सच्चे हीरे सरीखे
मैं पथरीले कंकड़ जैसा
जब तुम उलझन में पड़े हुए हो
तब अपनी फिर क्या बात करूँ मैं
क्या भूलूँ क्या याद करूँ मैं ?
सफर जहाँ से शुरू हुआ था
पहुँच गया हूँ उसी जगह पर
बाल खुजाते सोच रहा हूँ
फिर से क्या शुरुआत करूँ मैं?
क्या भूलूँ क्या याद करूँ मैं ?
क्या भूलूँ क्या याद करूँ मैं ?
तुम तो सच्चे हीरे सरीखे
मैं पथरीले कंकड़ जैसा
जब तुम उलझन में पड़े हुए हो
तब अपनी फिर क्या बात करूँ मैं
क्या भूलूँ क्या याद करूँ मैं ?
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