Many times you underestimate.....
Sometimes you underestimate to be embarrassed.....
Existence is never insignificant.....


बहुत छोटी सी
अदनी सी
चीज़ लगे थे तुम
मंज़िल की तो बात छोड़ो
पहुँच तुम्हारी सीढ़ी तक भी होगी
इस पर भी शक था मुझे
छोटे से तुम
छोटे छोटे से कदम तुम्हारे
वोह भी ज़मीन पर
मन ही मन हँसता मैं
कुलांचे भरता रहा हवा में
आज परेशान इस बात पर नही ....
तुम पहुँच गए.....
हैरान हूँ …
तुमसे ही पूछ रहा हूँ
पहुंचा कैसे जाता है?
आज भी तुम चीज़ हो...
पर पहुंची हुई





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