जब होती नहीं मयस्सर, लड़खड़ाते हो ज़मीन पर
डगमगाते भी हो बिलकुल, रिन्दों की तरह

सागर में उतरते ही,  चढ़ते हो आसमान में
हवा से पेंच लड़ाते हो, परिंदो की  तरह


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