कैसे करूँगा सामना कोहरे से इसी सोच विचार में लीन अथक श्रम किया है मैंने पर सोच अभी भी दीन कभी न कर पाया फैसला आज तो कुछ कर जाना है कर के PG मुझको भी धुंध से पार पाना है बहोत घबराया सा लग रहा था आज का आसमान अस्त व्यस्त, अस्थिर, अकुलाया सा किसी MBBS की तरह
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