एक बात बताओ
तुम इतना मीठा कैसे बोल लेते हो?
सुन्दर सुन्दर,तराशे हुए,
ठंडी ठंडी , मिठास लिए बोल
ठंडी ठंडी , मिठास लिए बोल
लाते कहाँ से हो तुम?
चाहता, तो मैं भी हूँ
बोलूँ, तो तुम्हारी तरह से
हो जाएँ सब खुश
तारीफ़ सुनकर अपनी
पर ऐसा होता कभी नहीं
मुँह जब भी खोलता हूँ
निकलती है भड़ास ही
वो भी तीखी, सुलगती हुई
तुम्हे पता है.…
मैंने एक बार
कुछ शब्दों को
मीठी चाशनी में हफ्तो
कुछ शब्दों को
मीठी चाशनी में हफ्तो
डाल कर रखा ....
इस्तेमाल करना चाहा जब
तो सब गल गए थे
शायद कुछ नालायक
बच भी निकले थे
बच भी निकले थे
सौदा कर लिया था उन्होंने
मिठास के बदले
अपना अर्थ चाशनी में घोल बैठे थे
किसी काम के
नहीं बचे थे वो
नहीं बचे थे वो
बच गई थी तो कड़वाहट
ज़बान में मेरी .…
ज़बान में मेरी .…
लेकिन सुना है मैंने
सच भी कड़वा होता है
है न...
सच भी कड़वा होता है
है न...
पर एक बात बताओ
तुम इतना मीठा कैसे बोल लेते हो?
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