और उधर सूरज
हताश है अपने आप से
सदियों से सुलगते रहने के
विचित्र इस अभिशाप से
आ गया है तंग वो
इस तेज से,  प्रताप से

अक्सर है सूरज सोचता
चाँद बेहद खुशनसीब है
दिखने में सुन्दर है ही
चांदनी भी करीब है

उधर चाँद क्या उसे भी कुछ
पता होगा ?.....

सूरज खुद को चांदनी
 में भिगोना चाहता है
और अगले जनम में
खुद चाँद होना चाहता है









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