कुछ लोग आने लगे हैं
अभिनय तुम्हारा देखने

क्यों न आज कुछ अलग करो
तुम किरदार को
अपना पूरा बदल डालो....
मायूसियत को करो रुखसत
दर्द को कर दो दफा
और मेरी मानो तो  आंसुओं
को भी चेहरे से पूरा हटा लो....
मत करो परवाह कि
'कोई' अभी आया नहीं
देर हो जाती है अक्सर
तुम ही हंस कर तब तक
क्यों न तमाशे को सम्भालो ....


मंजे हुए फनकार हो तुम
तुम्हारा अंदाज़ निराला है
बहुत हुआ अब चलो मंच पर
पर्दा उठने वाला है

कुछ लोग आने लगे हैं
अभिनय तुम्हारा देखने

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