बचपन में बड़ा गुमान था खुद पर …
चाँद मेरे  साथ साथ चलता था…
जो मैं चलता था तो वो चलता था …
समय से हाथापाई होती रही…
अब गुमान नहीं है, शुक्रगुज़ार हूँ मैं.…
शुक्रिया ओ मेरी साँस …
जो तू चलती है तो मैं चलता हूँ..... 

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