बस इनका ही सहारा था
आँसू ही सच्चे साथी थे
वाज़िब था तन्हाई में पर
दिख जाते तो अक्सर थे पर
आँखों में ही रह जाते थे
बन गई है इन मोतिओं से
आँसू ही सच्चे साथी थे
वाज़िब था तन्हाई में पर
क्यों हैं ये अब साथ में आँसू
दिख जाते तो अक्सर थे पर
आँखों में ही रह जाते थे
पहले थे गिरते कभी कभी अब
हर दिन औ हर रात में आँसू
बन गई है इन मोतिओं से
गहना मेरा अब, खामोशी
बात तो अब है हो नहीं पाती
लेकिन हैं हर बात में आँसू
सूख जायेंगे ये सब सारे
एक दिन चुक ही जायेंगे
दिखलाई तो नहीं देंगे पर
बहेंगे खयालात में आँसू
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