कितनी आसानी से
सीख गया था,
तुमने कपड़ों पर
मुगरी चलाते चलाते
सिखा दिया था मुझे

कापी पर चार सवाल तुम लिखती
मैं झट से उन्हें लगा कर
तुम्हे दिखा देता
बस पता ही नहीं चला
और जोड़ना आ गया मुझे

एरोप्लेन की स्पेलिंग
जब सीखी थी तुमसे
कई दिन तक उसी प्लेन में
बैठकर उड़ता ही रहा
घमंड के आसमान में

कितनी आसानी से सिखा दिया था
तुमने सब कुछ मुझको
कोशिश करता हूँ
सिखा दूँ वैसे ही
अपने बच्चों को भी
प्यार जो करता हूँ
उनसे बहोत मैं

जान तो तुम भी देती थी
हम सब पर
है न मम्मी...

कभी कभी अब सोचता हूँ
बिना आंसू बहाए
अपने बच्चों से विदा लेना
तो मैंने सीखा ही नहीं तुमसे

तुम्हे तो मालूम था
नहीं रहोगी साथ हमारे
ज्यादा दिन तक
कभी देखे नहीं आंसू
तुम्हारे चेहरे पर फिर भी

ज़रुरत पड़ेगी मुझे भी
कभी न कभी इसकी
जोड़ना तो सीखा दिया हँसी खेल में
हँसते हँसते अपनों से
घटना भी सीखा दो....
प्लीज़ मम्मी ....

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